धार्मिक योजनाएं अपने मानवीय दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये योजनाएं समाज के विभिन्न तत्वों को संगठित करके उन्हें एक माध्यम के रूप में उठाती हैं, जो लोगों के धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास का समर्थन करती हैं। इसलिए, ये योजनाएं व्यापक सामाजिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

  • गौ सेवा: गौ सेवा एक प्रमुख धार्मिक योजना है जो भारतीय समाज में प्रचलित है। इसका मुख्य उद्देश्य गौ माता की सुरक्षा, रक्षा और पालना करना है। इसके अंतर्गत, गोशालाओं की स्थापना, गौवंशों की देखभाल, और गौवंशों से प्राप्त होने वाले उत्पादों का उपयोग करके एक समृद्ध समाज के निर्माण का प्रयास किया जाता है।

  • गुरुकुल: गुरुकुल, शिक्षा के प्राचीनतम और प्रभावशाली प्रणालियों में से एक है। यह एक ऐसा स्थान है जहां छात्र गुरु के आदर्शों और मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करते हैं। गुरुकुलों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति, धार्मिकता, जीवन कौशल और विचारधारा को भी महत्व दिया जाता है। गुरुकुल पद्धति अब भी कुछ धाराओं में जीवित है और यह छात्रों को न केवल शिक्षा में मास्टर बनाती है, बल्कि उन्हें संपूर्ण व्यक्तित्व विकास की दिशा में भी आगे बढ़ाती है।

  • कोरोना काल में भंडारा: कोरोना महामारी के समय भंडारा योजना का अद्यतन और प्रगतिशील रूप से आयोजन किया गया है। इस योजना के तहत, खाद्य सामग्री और भोजन की व्यवस्था करके लोगों को अपूर्ण और जरूरतमंद परिवारों के लिए निःशुल्क भोजन प्रदान किया गया। इससे लोगों को पोषण सुरक्षा मिली और सामाजिक सहयोग के माध्यम से संगठित ढंग से उनकी मदद की गई।

  • गरीबों को भोजन कराया गया: धार्मिक संस्थान और समुदायों द्वारा आयोजित भोजन कार्यक्रम गरीब और असहाय परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा है। यहां पर लोगों को अवसर मिलता है जहां उन्हें पौष्टिक भोजन मिलता है और उनकी आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है। ये कार्यक्रम सामाजिक न्याय और समरसता को बढ़ावा देते हैं और गरीब वर्ग के लोगों के जीवन को सुखद और आरामदायक बनाने में मदद करते हैं।

  • गौशाला संचालन: धार्मिक योजनाओं में गौशालाओं की स्थापना और संचालन भी शामिल होता है। गौशालाएं गायों की सुरक्षा, देखभाल और प्रदर्शन के लिए बनाई जाती हैं। इससे गायों को सही खाद्यान, प्रदर्शन की देखभाल और आवास मिलता है, जो उनके अच्छे स्वास्थ्य और देखभाल के लिए महत्वपूर्ण है। गौशालाओं के माध्यम से भीड़-भाड़ में संगठित होकर गौ सेवा और सामाजिक कार्यों का प्रचार किया जाता है।

  • धार्मिक पठन-पाठन केंद्र (गुरुकुल): गुरुकुल धार्मिक शिक्षा को प्रशिक्षण एवं संस्कारों के माध्यम से प्रदान करने का एक प्रमुख केंद्र होता है। इन केंद्रों में छात्रों को धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन, ध्यान, योग, और आध्यात्मिक ज्ञान के विकास के लिए शिक्षा दी जाती है। गुरुकुलों में छात्रों का आत्म-विकास, नैतिकता, और सामाजिक दायित्व के संकल्प को बढ़ावा दिया जाता है।

  • राष्ट्रीय औषधीय पादप संस्थान: धार्मिक योजनाओं के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप संस्थानों की स्थापना की जाती है। ये संस्थान जड़ी-बूटियों और औषधीय पादपों के अध्ययन, उनके गुणों और उपयोग की शोध, विज्ञानिक अध्ययन और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए समर्पित होते हैं। इन संस्थानों के माध्यम से पुरानी और अतुल्य औषधीय पदार्थों के अध्ययन के साथ-साथ नवीनतम वैज्ञानिक खोज और उनके औषधीय महत्व का पता चलता है। इससे सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होता है और लोगों को औषधीय उपचार के लिए अधिक विकल्प प्राप्त होते हैं।

  • माधव मंदिर विकास: धार्मिक योजनाओं के अंतर्गत माधव मंदिरों का विकास और संरक्षण भी शामिल होता है। ये मंदिर धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थल होते हैं और उन्हें सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण होता है।

  • सामाजिक संघटना की बढ़ावा: धार्मिक योजनाएं सामाजिक संघटना को बढ़ावा देती हैं। ये योजनाएं लोगों को एकता, सहयोग और समरसता की भावना सिखाती हैं। धार्मिक समुदायों द्वारा आयोजित धार्मिक आयोजनों में लोगों को साथ लाने का एक महान् माध्यम होता है, जहां वे अपने आप को संबंधित समुदाय के हिस्सेदार महसूस करते हैं और सामूहिकता की भावना विकसित होती है।

  • शिक्षा के क्षेत्र में योगदान: धार्मिक योजनाएं शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करती हैं। गुरुकुलों के साथ-साथ अनेक धार्मिक संस्थान और मंदिरों द्वारा शिक्षा संस्थानों की स्थापना की जाती है। इन संस्थानों में छात्रों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक तत्वों, मॉरल वैल्यूज और संस्कृति का भी ज्ञान प्रदान किया जाता है।

  • चिकित्सा सेवाएं: धार्मिक योजनाओं में चिकित्सा सेवाओं का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। अधिकांश धार्मिक संस्थानों में चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाते हैं जहां निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जाती हैं। ये सेवाएं आमतौर पर आयुर्वेदिक उपचार, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, प्रार्थना आदि पर आधारित होती हैं। चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों की भारतीय परंपरा को सम्पर्क में लाया जाता है और लोगों को आध्यात्मिक और शारीरिक संतुलन के साथ उपचार प्राप्त होता है।

  • सामाजिक न्याय और समरसता: धार्मिक योजनाएं सामाजिक न्याय और समरसता को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये योजनाएं गरीब और दुर्भाग्यशाली लोगों के लिए आर्थिक सहायता, शिक्षा, आवास और रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। धार्मिक संगठनों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम, अन्नदान और आर्थिक सहायता की व्यवस्था होती है। इससे सामाजिक न्याय और समरसता के मूल्यों की प्रचार प्रचारित होती है और समाज की रूपांतरण को प्रोत्साहित किया जाता है।

  • सांस्कृतिक संवर्धन: धार्मिक योजनाएं सांस्कृतिक संवर्धन को भी प्रोत्साहित करती हैं। ये योजनाएं धार्मिक कार्यक्रमों, कवि सम्मेलनों, संगीत कार्यक्रमों, कला और शिल्प प्रदर्शनी, पुस्तकों के प्रकाशन आदि को समर्थन करती हैं। धार्मिक संस्थानों के माध्यम से संस्कृति, कला और परंपरा की महत्वपूर्णता को संरक्षित किया जाता है और युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों की गहरी समझ प्रदान की जाती है।

  • स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण: धार्मिक योजनाएं स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी प्रमुखता देती हैं। ये योजनाएं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, जल संरक्षण, पौधरोपण, वन संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और बाढ़ नियंत्रण जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। धार्मिक संगठनों के माध्यम से जनसाधारण को पर्यावरण संरक्षण के महत्व की जागरूकता दिलाई जाती है और उन्हें स्वच्छता के महत्व को समझाया जाता है।